IAS लॉबी में घमासान: जोशी दंपती के बचाव में उतरे पूर्व IAS माथुर, पूर्व CS अवनि वैश्य ने किया पलटवार
IAS लॉबी में घमासान: जोशी दंपती के मामले पर रिटायर्ड अफसर आमने-सामने
करोड़ों की कथित बेनामी संपत्ति मामले को लेकर 14 साल बाद फिर गरमाया विवाद
विशेष संवाददाता | भोपाल
मध्यप्रदेश के चर्चित जोशी दंपती बेनामी संपत्ति मामले को लेकर करीब 14 साल बाद एक बार फिर नौकरशाही के बीच बहस तेज हो गई है। मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप में रिटायर्ड वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच मामले की जांच और तत्कालीन कार्रवाई को लेकर तीखी बहस सामने आई।
विवाद उस समय बढ़ गया जब पूर्व IAS धीरज माथुर ने मामले को राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि यदि वे विभागीय जांच में होते तो संबंधित अधिकारी को बरी कर देते। इसके बाद पूर्व मुख्य सचिव अवनि वैश्य ने जांच की निष्पक्षता और तत्कालीन कार्रवाई का बचाव करते हुए जवाब दिया।
केंद्र के विज्ञापन से शुरू हुई बहस
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री के उप सचिव सुधीर कोचर द्वारा केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) का एक विज्ञापन वॉट्सएप ग्रुप में साझा किए जाने के बाद हुई। विज्ञापन IAS अधिकारियों की विभागीय जांच के लिए रिटायर्ड अधिकारियों का पैनल गठित करने से संबंधित था।
विज्ञापन पर चर्चा के दौरान धीरज माथुर ने विभागीय जांच की प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने जोशी दंपती के मामले का जिक्र करते हुए तत्कालीन कार्रवाई पर अपनी राय रखी।
धीरज माथुर ने कहा— 'मैं होता तो बरी कर देता'
पूर्व IAS धीरज माथुर ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें विभागीय जांचों से हमेशा आपत्ति रही है। उन्होंने एक हाई-प्रोफाइल मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्हें संबंधित अधिकारी की नीयत साफ होने का भरोसा था।
माथुर के अनुसार, मामला राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से प्रेरित था। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मानकों को देखते हुए यदि वे जांच स्वीकार करते तो संबंधित अधिकारी को बरी कर देते।
अवनि वैश्य का पलटवार— जांच के आधार पर हुई थी कार्रवाई
पूर्व मुख्य सचिव अवनि वैश्य ने माथुर के बयान पर पलटवार करते हुए तत्कालीन जांच और कार्रवाई का बचाव किया।
वैश्य के मुताबिक, अरविंद और टीनू जोशी के खिलाफ महत्वपूर्ण जांच पूर्व मुख्य सचिव स्वर्गीय निर्मला बुच ने की थी। उन्होंने कहा कि बुच भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर बेहद प्रतिबद्ध थीं।
अवनि वैश्य के अनुसार, निर्मला बुच ने मामले से जुड़े साक्ष्यों को खुद दर्ज किया और रिपोर्ट तैयार की थी। उनके मुताबिक इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर जोशी दंपती के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई थी।
पूर्व IAS शिवरामन ने भी जताई नाराजगी
बहस के दौरान पूर्व IAS शिवरामन ने भी जोशी परिवार और मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अरविंद जोशी के पिता एच.एम. जोशी का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक साहसी अधिकारी थे और उनके परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए अरविंद जोशी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से उन्हें काफी दुख हुआ था।
14 साल पुराने मामले ने फिर खींचा ध्यान
जोशी दंपती से जुड़ा यह मामला मध्यप्रदेश की नौकरशाही के चर्चित मामलों में रहा है। अब रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इस बहस ने पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
एक तरफ पूर्व IAS धीरज माथुर ने विभागीय जांच की प्रक्रिया और मामले की मंशा पर सवाल उठाए हैं, वहीं पूर्व मुख्य सचिव अवनि वैश्य ने तत्कालीन जांच को गंभीर और साक्ष्य आधारित बताते हुए उसका बचाव किया है।
फिलहाल दोनों पक्षों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
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