टैंकों का 'काल' जैवलिन अब भारत के पास: अमेरिका से डील फाइनल, सीमा पर बढ़ेगी एंटी-टैंक ताकत
बुलेट रिपोर्ट नई दिल्ली। भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत और अमेरिका के बीच जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद का समझौता हुआ है। भारतीय सेना ने अमेरिकी Foreign Military Sales प्रक्रिया के तहत Letter of Offer and Acceptance (LOA) पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी मिशन ने भी इस समझौते की पुष्टि की है।
भारतीय रक्षा सूत्रों के मुताबिक, करीब 292 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 60 जैवलिन मिसाइलों की खरीद की जा रही है। हालांकि अमेरिकी आधिकारिक बयान में अभी मिसाइलों की संख्या और समझौते की कुल कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है।
16 साल बाद पूरा हुआ लंबा इंतजार
जैवलिन को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत करीब डेढ़ दशक से चल रही थी। 2010 के आसपास भारत ने इस सिस्टम में रुचि दिखाई थी, लेकिन तकनीक हस्तांतरण से जुड़े मुद्दों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
बाद में भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इजराइल की स्पाइक मिसाइलों का इस्तेमाल किया और स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया। अब जैवलिन की खरीद से भारतीय सेना को एक और आधुनिक एंटी-आर्मर विकल्प मिलने जा रहा है।
292 करोड़ की डील, करीब 60 मिसाइलों की जानकारी
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह खरीद Emergency Procurement के तहत की गई है। इसी प्रक्रिया के तहत भारतीय सेना को सीमित संख्या में जैवलिन सिस्टम हासिल होंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 60 मिसाइलों की खरीद पर लगभग 292 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एक अन्य रिपोर्ट में 16 लॉन्च यूनिट और 64 FGM-148F मिसाइलों की जानकारी दी गई है, इसलिए अंतिम कॉन्फिगरेशन को लेकर आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार करना बेहतर होगा।
भारत में निर्माण की संभावना भी खुली
इस समझौते का महत्व सिर्फ मिसाइलों की खरीद तक सीमित नहीं है। अमेरिकी पक्ष ने कहा है कि यह समझौता भविष्य में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी जैवलिन समझौते को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भविष्य में co-production की संभावनाओं का उल्लेख किया है।
जैवलिन बनाने वाली Javelin Joint Venture, जिसमें Lockheed Martin और RTX शामिल हैं, भारत में भविष्य में co-assembly और co-production की संभावनाओं पर पहले से काम कर रही है। कंपनी ने Bharat Dynamics Limited के साथ भी इस दिशा में समझौता किया था।
क्यों खास है जैवलिन?
जैवलिन एक मैन-पोर्टेबल, शोल्डर-लॉन्च्ड और फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है। इसका इस्तेमाल बख्तरबंद वाहनों और मजबूत ठिकानों के खिलाफ किया जा सकता है।
इसकी प्रमुख खासियतों में टॉप-अटैक क्षमता शामिल है। मिसाइल लक्ष्य के अपेक्षाकृत कमजोर ऊपरी हिस्से को निशाना बना सकती है। फायर-एंड-फॉरगेट प्रणाली के कारण मिसाइल दागने के बाद ऑपरेटर को लगातार उसे नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती।
सीमा पर बढ़ेगी भारतीय सेना की मारक क्षमता
जैवलिन की सीमित संख्या में होने वाली यह खरीद भारतीय सेना की मौजूदा एंटी-टैंक क्षमता को तत्काल मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां पैदल सैनिकों के लिए हल्के और पोर्टेबल एंटी-आर्मर सिस्टम की जरूरत होती है, वहां यह क्षमता उपयोगी साबित हो सकती है।
भारत पहले से स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल विकसित कर रहा है। ऐसे में जैवलिन की खरीद को तत्काल परिचालन जरूरत और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता—दोनों के बीच संतुलन के तौर पर देखा जा सकता है।
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