जिसे गर्भवती का BP नापना था, उसे कलेक्टर ने सिखाया तरीका! टीकमगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
ब्यूरो रिपोर्ट टीकमगढ़।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उस समय सामने आ गई, जब जिले के एक उप स्वास्थ्य केंद्र के औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के सामने गंभीर लापरवाही उजागर हुई। गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर जांचने के लिए जब सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) रितु अहिरवार से कहा गया तो वह सही तरीके से बीपी जांच नहीं कर पाईं। इसके बाद कलेक्टर ने स्वयं मशीन हाथ में लेकर जांच की प्रक्रिया समझाई और मौके पर ही CHO को प्रशिक्षण दिया।
कलेक्टर ने खुद संभाली बीपी मशीन
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसी दौरान गर्भवती महिला की स्वास्थ्य जांच कराई गई। जब CHO से ब्लड प्रेशर मापने को कहा गया तो वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने खुद बीपी मशीन से जांच कर सही तरीका बताया।
इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात कर्मचारियों की कार्यकुशलता और प्रशिक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीज रजिस्टर में भी मिली लापरवाही
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड की जांच की गई तो मरीज रजिस्टर में भी खामियां सामने आईं। कई मरीजों की एंट्री तो दर्ज थी, लेकिन उनमें तारीख तक नहीं लिखी गई थी। रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
1200 की आबादी, तीन स्वास्थ्य कर्मियों के भरोसे
बताया गया कि संबंधित क्षेत्र की करीब 1200 की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी केवल तीन स्वास्थ्य कर्मियों पर है। सीमित स्टाफ के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बुनियादी जांच प्रक्रिया में कमी सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
CHO की जिम्मेदारियां
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनकी जिम्मेदारी प्राथमिक उपचार देने, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग करने और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच में सहयोग करने की होती है।
ऐसे में गर्भवती महिला का बीपी जांचने में असफल रहने की घटना स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षण व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।
CHO को नोटिस जारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित CHO रितु अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि मामले में केवल कर्मचारी स्तर पर कार्रवाई होती है या फिर जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाती है।
बड़ा सवाल:
जब गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर जांचने के लिए कलेक्टर को खुद मशीन पकड़कर तरीका बताना पड़े, तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर किस भरोसे चल रही है?
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