आजादी के 80 साल बाद भी सड़क को तरस रहा गोदरी-6, बारिश में घुटनों तक कीचड़ से गुजरते हैं ग्रामीण
आजादी के 80 साल बाद भी सड़क को तरस रहा गोदरी-6, बारिश में घुटनों तक कीचड़ से गुजरते हैं ग्रामीण
बुलेट रिपोर्टर।
रीवा/गंगेव। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच ग्राम पंचायत गोदरी-10 के ग्राम गोदरी-6 की तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि देश को आजाद हुए करीब 80 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनका गांव आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहा है। बारिश शुरू होते ही गांव का रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और ग्रामीणों को घुटनों तक कीचड़ के बीच से होकर आवागमन करना पड़ता है।
बारिश आते ही गांव बन जाता है कीचड़ का दलदल
ग्रामीणों के मुताबिक गांव की आबादी करीब 500 से 600 लोगों की है। लेकिन बरसात के मौसम में यहां रहने वाले लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। रास्ते पर जगह-जगह कीचड़ और पानी जमा होने से पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ती है। बच्चों को पढ़ाई के लिए घर से निकलते समय यह तक सोचना पड़ता है कि वे कीचड़ भरे रास्ते से सुरक्षित स्कूल पहुंच पाएंगे या नहीं।
जरा सी बारिश और थम जाता है गांव का आवागमन
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में गांव की स्थिति ऐसी हो जाती है कि सामान्य आवागमन भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता। कीचड़ में पैर फिसलने का खतरा बना रहता है। यदि किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ जाए या किसी गर्भवती महिला अथवा बुजुर्ग को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े, तो परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब देश आधुनिक विकास और बेहतर सड़कों की बात कर रहा है, तब गोदरी-6 के लोगों को आज भी बारिश में कीचड़ से होकर क्यों गुजरना पड़ रहा है?
गोदरी- 10 को निर्मल पंचायत, जमीन पर बदहाली का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत गोदरी 10 को निर्मल पंचायत की श्रेणी में शामिल किया गया है, लेकिन गांव की जमीनी तस्वीर अलग कहानी बयां करती है। ग्रामीणों के अनुसार सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ हर जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजनाओं और विकास कार्यों का सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ होता तो आज उन्हें मूलभूत सड़क सुविधा के लिए इस तरह संघर्ष नहीं करना पड़ता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराने और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब लेने की मांग की है।
समस्त ग्रामवासियों ने कलेक्टर महोदय जी से मांग की है कि ग्राम गोदरी-6 की जमीनी स्थिति की जांच कराकर सड़क निर्माण की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी रास्ता चाहिए जिससे बरसात के दिनों में बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और आम लोगों का आवागमन बाधित न हो।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बुनियादी अधिकार का है
गोदरी-6 के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ कीचड़ भरे रास्ते तक सीमित नहीं है। यह सवाल इस बात का भी है कि आजादी के 80 साल बाद भी क्या किसी गांव के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन के लिए संघर्ष करना पड़ना चाहिए?
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचने के बाद भी गोदरी-6 की तस्वीर बदलती है या फिर बरसात खत्म होने के साथ यह समस्या भी सरकारी फाइलों की तरह दबकर रह जाती है।
क्या यह खबर उपयोगी थी?
इस लेख को शेयर करें:
