लिफ्ट हादसे में युवक की मौत पर बवाल: नेशनल हॉस्पिटल के बाहर परिजनों का धरना, रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग
लिफ्ट हादसे में युवक की मौत पर बवाल: नेशनल हॉस्पिटल के बाहर धरने पर बैठे परिजन
बुलेट रिपोर्टर रीवा। नेशनल हॉस्पिटल में लिफ्ट हादसे में युवक की मौत के बाद रविवार को परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। मृतक के परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने अस्पताल का पंजीयन तत्काल निरस्त करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
बताया गया कि शनिवार देर रात अस्पताल की लिफ्ट अचानक नीचे गिर गई थी। हादसे में अमरपाटन निवासी आशीष सेन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद से ही परिजनों में आक्रोश बना हुआ था।
अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप
धरने पर बैठे परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण युवक की जान गई। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी जगह पर मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन लिफ्ट जैसी मूलभूत सुविधा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों ने लिफ्ट की तकनीकी स्थिति, उसके रखरखाव और सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग की है।
‘मौत की कीमत तय करने’ का भी आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मामले को दबाने और समझौता कराने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कथित तौर पर ढाई लाख रुपये तक की राशि की पेशकश कर मामले को शांत कराने की कोशिश की गई।
हालांकि, यह आरोप फिलहाल परिजनों के दावे के रूप में सामने आया है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर खबर में उसे भी शामिल किया जाना जरूरी होगा।
रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की मांग
परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक युवक की मौत का मामला नहीं है, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और नेशनल हॉस्पिटल का पंजीयन निरस्त किया जाए।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद अस्पताल में लिफ्ट की तकनीकी जांच, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजन जानना चाहते हैं कि लिफ्ट की आखिरी बार तकनीकी जांच कब हुई थी और क्या अस्पताल में संचालित लिफ्ट निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी।
धरने के दौरान अस्पताल के बाहर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मामले में पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल: सुरक्षा में चूक हुई तो जिम्मेदार कौन?
एक निजी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? लिफ्ट का नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस हुआ था या नहीं? यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी—इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट पर निर्भर हैं।
फिलहाल मृतक के परिजन कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
क्या यह खबर उपयोगी थी?
इस लेख को शेयर करें:
