सरभंगा जंगल में दफन मिला बाघ का अस्थि-पंजर, जंगली सुअर के शिकार के लिए लगाए करंट से हुई थी मौत
सतना। जिले की मझगवां वन परिक्षेत्र के सरभंगा सर्किल अंतर्गत तागी-बिछियन के घने जंगल में वन विभाग ने दो माह पुराने बाघ के शिकार के मामले का खुलासा किया है।
डॉग स्क्वॉड और विशेष टीम की सघन तलाश के बाद उस स्थान का पता लगाया गया, जहां बाघ को मौत के बाद दफना दिया गया था। खुदाई कर मौके से बाघ का अस्थि-पंजर बरामद किया गया। मामले में वन विभाग ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
वन विभाग के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जंगल में जंगली सुअर का शिकार करने के उद्देश्य से अवैध रूप से बिजली का करंट बिछाया गया था। इसी करंट की चपेट में आकर एक बाघ की मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपियों ने मामला छिपाने के लिए जंगल में गड्ढा खोदकर बाघ के शव को दफना दिया।
मुखबिर की सूचना से खुला राज
वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) मयंक चांदीवाल ने बताया कि करीब पांच दिन पहले मुखबिर से सूचना मिली थी कि सरभंगा क्षेत्र में बाघ का शिकार कर उसके साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया है।
सूचना के आधार पर वन विभाग ने जांच शुरू की। एक जुलाई को घटना की पुष्टि होने के बाद डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता तथा मझगवां रेंज की टीम ने रेंजर रंजन सिंह परिहार के नेतृत्व में जंगल में व्यापक सर्च अभियान चलाया।
घने लैंटाना वनस्पति और दुर्गम क्षेत्र के कारण शुरुआती तलाशी में सफलता नहीं मिली।
जांच के दौरान वन सुरक्षा में तैनात एक चौकीदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ मिलकर घटना को अंजाम देने और बाघ के शव को दफनाने की जानकारी दी।
दो माह बाद बरामद हुए अवशेष
आरोपियों की निशानदेही पर वन विभाग ने खुदाई कर बाघ का अस्थि-पंजर बरामद किया। वन विभाग ने अवशेषों को कब्जे में लेकर आगे की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जांच जारी, बढ़ सकती हैं धाराएं
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग यह भी पता लगा रहा है कि इस घटना में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीव अपराध की किसी भी जानकारी की तत्काल सूचना विभाग को दें।
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