दुनिया की सबसे अहम तेल लाइफलाइन पर बढ़ा तनाव: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका-ईरान आमने-सामने
बुलेट रिपोर्टर ब्यूरो नई दिल्ली |
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। दूसरी ओर ईरान भी इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बनाए हुए है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। इसकी कुल चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है, जबकि जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए नौवहन चैनल केवल करीब 2 मील चौड़ा है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 21 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन औसतन 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और गैस का परिवहन इसी मार्ग से हुआ। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य टकराव बढ़ता है या समुद्री यातायात बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 100 से 200 प्रतिशत तक उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा सैन्य गतिविधियों ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। हालांकि अमेरिका की इस क्षेत्र में मजबूत नौसैनिक उपस्थिति है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थायी और पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना किसी भी देश के लिए आसान नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला और तनाव बढ़ा, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
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