19 लाख के साइबर फ्रॉड में MBA डिग्रीधारी गिरफ्तार, मैहर से चलता था इंटरस्टेट ठगी का नेटवर्क
बुलेट रिपोर्टर सतना/मैहर। राजस्थान के बारां जिले की रहने वाली द्रोपदी बाई से 19 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में मैहर से संचालित इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। पहले कियोस्क संचालक और एक ड्राइवर की गिरफ्तारी के बाद अब राजस्थान पुलिस ने मैहर निवासी एमबीए डिग्रीधारी विनोद सिंह (34) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनके दस्तावेज बिहार और रीवा के साइबर ठगों तक पहुंचाता था।
बारां जिले के ग्राम अवाई निवासी द्रोपदी बाई और उनके पति रमेशचंद्र धाकड़ को डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन के मुआवजे के रूप में करीब 18 लाख रुपये मिले थे। यह राशि दो फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में जमा कराई गई थी। 19 जून 2025 को बैंक पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके खातों से करीब 19 लाख रुपये निकाल लिए गए हैं। खास बात यह रही कि न तो किसी प्रकार का ओटीपी आया और न ही कोई संदिग्ध कॉल प्राप्त हुई। शिकायत के बाद दर्ज प्रकरण की करीब 13 माह तक जांच चली।
जांच के दौरान 16 जुलाई को राजस्थान पुलिस ने मैहर में कार्रवाई करते हुए डेल्हा निवासी ड्राइवर राजन साकेत और कियोस्क संचालक श्रीकांत लखेरा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में श्रीकांत ने एमबीए पास विनोद सिंह का नाम उजागर किया। इसके बाद 19 जुलाई को पुलिस ने दोबारा मैहर पहुंचकर विनोद सिंह को हिरासत में लिया।
पूछताछ में विनोद सिंह ने बताया कि वह श्रीकांत लखेरा के साथ गांव-गांव जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं और आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद खाताधारकों की पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर उन्हें बिहार और रीवा के साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था। इन्हीं खातों का उपयोग द्रोपदी बाई के खाते से रकम निकालने में किया गया।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल मोबाइल फोन और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। साथ ही चिन्हित बैंक खातों को फ्रीज कराकर 4 लाख 58 हजार रुपये की राशि होल्ड कराई गई है।
पुलिस का कहना है कि इस इंटरस्टेट साइबर गिरोह में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है और मामले की जांच जारी है।
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