'मैं मीटिंग में हूं, तुरंत पेमेंट करो'... MP में 'बॉस स्कैम' से 29 करोड़ की ठगी, कॉरपोरेट घराने निशाने पर
साइबर ठगी का हाईटेक पैंतरा: MP में 'बॉस स्कैम' से 29 करोड़ की चपत, कॉरपोरेट घराने निशाने पर
बुलेट रिपोर्टर विशेष | भोपाल।
मध्यप्रदेश में साइबर अपराधियों ने ठगी का दायरा आम लोगों से आगे बढ़ाकर अब बड़े कारोबारी संस्थानों, कॉरपोरेट घरानों और सीए फर्मों तक पहुंचा दिया है। साइबर ठगों ने 'बॉस स्कैम' या CEO फ्रॉड के नाम से एक नया तरीका अपनाया है। इस हाईटेक ठगी में फर्जी CEO, डायरेक्टर या कंपनी मालिक की प्रोफाइल बनाकर अकाउंटेंट और फाइनेंस टीम पर तत्काल पेमेंट करने का दबाव बनाया जाता है।
प्रदेश में इस तरह की ठगी से अब तक करीब 29 करोड़ रुपये की चपत लगने की जानकारी सामने आई है। ग्वालियर, सतना, बीना और कटनी में सामने आए मामलों की साइबर पुलिस जांच कर रही है।
'मैं मीटिंग में हूं, तुरंत पेमेंट करो'—ऐसे बिछाते हैं जाल
साइबर ठग किसी कंपनी के चेयरमैन, सीईओ, डायरेक्टर या मालिक की हूबहू दिखने वाली फर्जी डिजिटल प्रोफाइल और व्हाट्सएप आईडी तैयार करते हैं। इसके बाद कंपनी के अकाउंटेंट या फाइनेंस हेड को मैसेज भेजा जाता है।
पहले मैसेज में कहा जाता है—'मैं बेहद जरूरी मीटिंग में हूं, कॉल मत करना।' इसके बाद तत्काल भुगतान का दबाव बनाया जाता है।
ठग मैसेज भेजते हैं कि किसी पार्टी या वेंडर को जरूरी पेमेंट करना है और रकम तुरंत बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करनी है। कॉल से बचने और केवल चैट पर बातचीत करने के कारण कर्मचारी कई बार फर्जीवाड़े को समय रहते पहचान नहीं पाते।
शाम 4 से 5 बजे के बीच 'स्ट्राइक'
जांच में सामने आए मामलों के मुताबिक ठग अक्सर शाम 4 से 5 बजे के बीच इस तरह की ठगी को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। इस समय बैंकिंग कामकाज बंद होने की ओर होता है और कर्मचारी के पास भुगतान की दोबारा पुष्टि करने का समय कम रहता है।
ठग इसी जल्दबाजी और वरिष्ठ अधिकारी के आदेश मानने की मानसिकता का फायदा उठाते हैं।
ग्वालियर में 21.05 करोड़ की सबसे बड़ी ठगी
ग्वालियर में करीब 21.05 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया। आरोप है कि चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े एक वरिष्ठ सीए की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। करीब 76 बैंक खातों में 106 बार लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सतना में 3.50 करोड़ का चूना
सतना में करीब 3.50 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया। यहां प्रतिष्ठित कारोबारी फर्म के शीर्ष प्रबंधन के नाम से फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार की गई और अकाउंट टीम को इमरजेंसी पेमेंट के नाम पर रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव में लिया गया।
बीना में 2.90 करोड़ की ठगी
बीना में करीब 2.90 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई। यहां औद्योगिक कंपनी के अधिकारी बनकर वेंडर के पुराने बिल के भुगतान का बहाना बनाया गया और रकम दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा ली गई।
कटनी में 1.50 करोड़ की ठगी
कटनी में करीब 1.50 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय पाठक की कंपनी के शीर्ष अधिकारी के नाम से अकाउंट सेक्शन को झांसा दिया गया और करीब 1.50 करोड़ आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा लिए गए।
ठगों के तीन बड़े बहाने, इनसे रहें सावधान
1. 'सीक्रेट प्रोजेक्ट है, किसी से चर्चा मत करना'
ठग किसी गोपनीय प्रोजेक्ट, बड़ी डील या कंपनी अधिग्रहण का हवाला देकर कर्मचारी को दूसरे अधिकारियों से पुष्टि करने से रोकते हैं।
2. 'मीटिंग में हूं, सिर्फ टेक्स्ट पर बात होगी'
ठग फोन पर बात करने से साफ मना करते हैं ताकि आवाज की पहचान न हो सके। पूरा संवाद चैट के जरिए चलाया जाता है।
3. 'वेंडर का बैंक अकाउंट बदल गया है'
फर्जी लेटरहेड या दस्तावेज भेजकर बताया जाता है कि वेंडर का पुराना बैंक खाता बदल गया है और नए खाते में तत्काल भुगतान करना जरूरी है।
कंपनियों के लिए जरूरी सावधानी
किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए तत्काल भुगतान के निर्देश पर केवल व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी से फोन कॉल या आमने-सामने संपर्क कर स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
कंपनियों को बड़े भुगतान के लिए दो स्तर की अनुमति, बैंक खाता बदलने पर अतिरिक्त सत्यापन और फाइनेंस टीम के लिए साइबर फ्रॉड संबंधी प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।
साइबर ठग तकनीक के साथ अपना तरीका बदल रहे हैं। ऐसे में जल्दबाजी में लिया गया एक फैसला कंपनी के करोड़ों रुपये को कुछ ही मिनटों में खतरे में डाल सकता है।
क्या यह खबर उपयोगी थी?
इस लेख को शेयर करें:
