CM डॉ. मोहन यादव का बड़ा फैसला: मध्यप्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पारित, जानें क्या होंगे बड़े बदलाव
बुलेट रिपोर्टर ब्यूरो भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य विधानसभा ने सोमवार को 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026' ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के इतिहास का स्वर्णिम दिन बताते हुए कहा कि यह कानून समानता, सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पूरे प्रदेश में कानून के रूप में लागू होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में पार्टी समानता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून प्रभावी होगा।
महिलाओं को मिलेगा समान अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद एक से अधिक विवाह अपराध की श्रेणी में आएंगे। इससे महिलाओं को न्याय मिलेगा और उनके अधिकार मजबूत होंगे। उत्तराधिकार के मामलों में भी महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। दत्तक संतान सहित पारिवारिक अधिकारों में भी समानता सुनिश्चित की जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर भी सख्त प्रावधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्धारित आयु सीमा का उल्लंघन कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है या इसका दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
प्रदेश नई ऊंचाई पर पहुंचा : मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार नैतिक मूल्यों के आधार पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश ने यूसीसी विधेयक पारित कर एक नई मिसाल कायम की है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज में भेदभाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून ही न्यायपूर्ण व्यवस्था की आधारशिला है।
सोशल मीडिया पर दी बधाई
यूसीसी विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। यह कानून नारी सशक्तिकरण, समान न्याय, समान अधिकार और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
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