11 माह की निगरानी के बाद बाघिन को मिली आजादी, अब खुले जंगल में बसाएगी अपना कुनबा
बुलेट रिपोर्टर उमरिया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहली बार रेस्क्यू के बाद रेडियो कॉलर लगाकर करीब 11 माह तक निगरानी में रखी गई बाघिन को अब पूरी तरह प्राकृतिक आवास में मुक्त कर दिया गया है। खराब हो चुके रेडियो कॉलर को हटाने के बाद वन विभाग ने उसे खुले जंगल में छोड़ दिया है। अब बाघिन अपने स्वाभाविक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेगी और उसके प्रजनन की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
वन विभाग के अनुसार, अगस्त 2025 में धमोखर क्षेत्र में छोड़ी गई इस बाघिन की हाल ही में करीब 10 दिनों तक ट्रैकिंग नहीं हो पाई थी। जांच में पता चला कि उसके रेडियो कॉलर से सैटेलाइट और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल मिलना बंद हो गए थे। इसकी सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) भोपाल को दी गई।
अनुमति मिलने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने अभियान चलाकर बाघिन को सुरक्षित तरीके से बेहोश किया और खराब रेडियो कॉलर को हटाया। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया।
क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बाघिन ने धमोखर के जंगलों में ही अपना क्षेत्र बना लिया था और वह मानव आबादी की ओर नहीं गई। यह वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पतौर क्षेत्र में मानव बस्तियों के समीप लगातार विचरण करने के कारण ही उसे रेस्क्यू किया गया था।
वन अधिकारियों के मुताबिक, निगरानी के दौरान बाघिन को एक नर बाघ के साथ भी देखा गया था। ऐसे में उम्मीद है कि वह जल्द ही जंगल में अपना कुनबा बसाएगी और बांधवगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
रेडियो कॉलर हटाने का अभियान पीएफ-126 (बरबसपुर-झांझर, धमोखर बफर) क्षेत्र में चलाया गया। अभियान में उप संचालक, सहायक संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित 63 अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया। लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम हाथियों तथा उनके महावतों ने भी अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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