बारिश ने छीनी छत: टिकुरी में दो अधकच्चे मकान धराशायी, परिवारों के सामने रहने-खाने का संकट
रीवा | ब्यूरो रिपोर्ट
दो दिन पहले हुई लगातार बारिश अब मनगवां तहसील के ग्रामीण इलाकों में तबाही के निशान छोड़ रही है। चन्देह दुग्गवा के बाद अब टिकुरी गांव नंबर-37 में कच्चे और अधकच्चे मकानों के गिरने का मामला सामने आया है। तेज बारिश और हवा के चलते अनिल विश्वकर्मा एवं बैजनाथ विश्वकर्मा के अधकच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
मकान गिरने से घर में रखा अनाज, राशन और घरेलू सामान भी मलबे में दबकर खराब हो गया। हालात यह हैं कि प्रभावित परिवारों के पास अब रहने के लिए सुरक्षित छत तक नहीं बची है।
मकान गिरा, गृहस्थी मलबे में तब्दील
बताया गया कि बारिश के दौरान दोनों मकानों की हालत पहले से ही जर्जर थी। तेज हवा और लगातार बारिश के दबाव के बाद दोनों मकान धराशायी हो गए। मकान गिरने से घर में रखा अनाज और अन्य घरेलू सामग्री मलबे में दबकर खराब हो गई।
परिवारों का कहना है कि अब उनके पास न रहने के लिए घर है और न ही पर्याप्त राशन-पानी बचा है। बारिश का दौर जारी रहने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
तहसील में शिकायत, राहत का इंतजार
घटना की शिकायत मनगवां तहसील में दर्ज कराई जा चुकी है। प्रभावित परिवारों के मुताबिक, अब तक प्रशासन की ओर से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी है। परिवारों का कहना है कि वे लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं और सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता है।
'झोपड़ी भी नहीं बची, राशन-पानी खत्म'
अनिल विश्वकर्मा और बैजनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि मकान पूरी तरह खराब हो चुका है। रहने के लिए झोपड़ी तक नहीं बची है। घर में रखा राशन-पानी भी बर्बाद हो गया।
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन कराने और रहने-खाने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
कलेक्टर के निर्देश के बावजूद राहत पर सवाल
बारिश से मकान गिरने की घटनाओं के बाद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को तत्काल रहने और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद टिकुरी गांव में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत नहीं मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मौके का तत्काल निरीक्षण कर क्षति का आकलन कराया जाए और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय, राशन तथा नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट — रीवा, मध्यप्रदेश।
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