करोड़ों का बकाया और रोजगार में उपेक्षा का आरोप, डालमिया भारत सीमेंट के खिलाफ स्थानीय ठेकेदारों-श्रमिकों का प्रदर्शन
रीवा | ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा जिले के जेपी रीवा सीमेंट प्लांट, जिसका संचालन वर्तमान में डालमिया भारत सीमेंट द्वारा किया जा रहा है, एक बार फिर विवादों में है। स्थानीय ठेकेदारों, परिवहन व्यवसायियों, आपूर्तिकर्ताओं, श्रमिकों और भूमि प्रभावित परिवारों ने जिला कलेक्टर को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर कंपनी पर करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित रखने और स्थानीय लोगों की उपेक्षा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ज्ञापन के अनुसार, जिन स्थानीय लोगों की जमीन पर सीमेंट प्लांट और खदानें संचालित हो रही हैं, उन्हीं लोगों के करोड़ों रुपये के बिल वर्षों से बकाया हैं। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के लिए निर्माण कार्य, मशीनरी, परिवहन, सामग्री आपूर्ति और अन्य सेवाएं दीं, लेकिन आज तक उनका भुगतान नहीं हुआ। इससे कई व्यवसायी आर्थिक संकट में हैं, बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ हैं और कर्मचारियों का वेतन देना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वामित्व परिवर्तन के समय कंपनी प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि किसी भी कर्मचारी, ठेकेदार या व्यवसायी के रोजगार और भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन वर्तमान में न तो पुराने बकाया का समाधान किया जा रहा है और न ही स्थानीय लोगों को पहले की तरह कार्य दिया जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों की जगह बाहरी ठेकेदारों एवं मजदूरों को प्राथमिकता दे रही है। इससे क्षेत्र के हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कंपनी प्रबंधन को तलब कर लंबित भुगतान का तत्काल समाधान कराया जाए, प्रशासन की मौजूदगी में संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, स्थानीय ठेकेदारों एवं परिवहन व्यवसायियों को कार्य आवंटन में प्राथमिकता मिले तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए। साथ ही छह माह से लंबित मजदूरों के वेतन का भुगतान, हटाए गए कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति, भूमि प्रभावित परिवारों को रोजगार, लेबर सप्लाई से जुड़े मुद्दों का समाधान और सीएसआर के तहत आसपास के गांवों में विकास कार्य कराने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय लोगों का उद्देश्य उद्योग का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने वैध अधिकारों और वर्षों की मेहनत की कमाई प्राप्त करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे।
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