महंगाई की मार: ऑटो पार्ट्स और इंजन ऑयल के दाम 30% तक बढ़े, कार-बाइक की सर्विसिंग हुई महंगी
महंगाई की मार: ऑटो पार्ट्स और ऑयल के दाम बढ़े, वाहन की रिपेयरिंग हुई महंगी
बुलेट रिपोर्टर रीवा। महंगाई का असर अब लोगों के वाहनों की सर्विसिंग और रिपेयरिंग पर भी दिखाई देने लगा है। ऑटो स्पेयर पार्ट्स और लुब्रिकेंट ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दोपहिया, चार पहिया और कमर्शियल वाहनों की मरम्मत एवं सर्विसिंग पहले की तुलना में महंगी हो गई है।
ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, विशेष रूप से एल्यूमिनियम से बने स्पेयर पार्ट्स और लुब्रिकेंट मोबिल ऑयल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर वाहन मालिकों के सर्विसिंग बिल पर पड़ रहा है।
स्पेयर पार्ट्स 10 से 15 प्रतिशत तक महंगे
ऑटोमोबाइल कंपनियों से जुड़े सेल्समैन के अनुसार बाइक से लेकर कमर्शियल और भारी वाहनों तक के कई स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
कारोबारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में एक-दो साल के अंतराल में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि करती रही हैं, लेकिन इस बार कई उत्पादों की कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
इंजन ऑयल में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
लुब्रिकेंट और इंजन ऑयल की कीमतों में सबसे ज्यादा वृद्धि बताई जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक कई उत्पादों के दाम 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं।
छोटे ब्रांड के इंजन ऑयल में करीब 50 से 100 रुपये, जबकि बड़े ब्रांड के कुछ इंजन ऑयल में 100 से 150 रुपये तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। ग्रीस और अन्य प्रकार के ऑयल भी महंगे हुए हैं।
कमर्शियल वाहनों की ट्रांसपोर्टिंग पर भी असर
स्पेयर पार्ट्स, ग्रीस और इंजन ऑयल महंगे होने का असर सिर्फ निजी वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है। कमर्शियल वाहनों की ऑपरेटिंग और मेंटेनेंस लागत बढ़ने से ट्रांसपोर्टिंग कारोबार पर भी दबाव बढ़ रहा है।
कारोबारियों के अनुसार ईंधन, मैन्युफैक्चरिंग और परिवहन लागत में वृद्धि को ऑटो पार्ट्स एवं अन्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ने की आशंका
ऑटो पार्ट्स और सर्विसिंग महंगी होने के साथ परिवहन लागत बढ़ने का असर आम यात्रियों पर भी पड़ सकता है। खबर के अनुसार कुछ बस संचालकों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की है।
यदि वाहनों के रखरखाव और संचालन की लागत लगातार बढ़ती रही तो इसका असर सार्वजनिक परिवहन के किराए पर भी पड़ सकता है। इससे मध्यमवर्ग और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट और प्रभावित होने की आशंका है।
रोजाना वाहन चलाने वालों के लिए बढ़ी परेशानी
दोपहिया वाहनों से रोजाना नौकरी, व्यापार या अन्य काम के लिए लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए स्पेयर पार्ट्स और इंजन ऑयल की बढ़ती कीमत अतिरिक्त खर्च का कारण बन रही है।
वाहन की नियमित सर्विसिंग से लेकर किसी पार्ट के खराब होने पर उसकी रिपेयरिंग तक, अब वाहन मालिकों को पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
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