उफनती नदी में जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा, श्मशान घाट तक पुल तक नहीं
उफनती नदी में जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा, श्मशान घाट तक पुल तक नहीं
बुलेट रिपोर्टर सीहोर। सरकार के विकास के दावों के बीच सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के कचनारिया गांव से बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को उफनती नदी के बीच से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ा। गांव से श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने नदी पार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
कंधों पर शव लेकर उफनती नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
मामला इछावर ग्राम पंचायत मूडला खुर्द के कचनारिया गांव का बताया जा रहा है। गांव की एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद जब अंतिम यात्रा निकली तो श्मशान घाट तक पहुंचने के रास्ते में नदी उफान पर थी। ऐसे में ग्रामीणों ने कंधों पर शव उठाया और तेज बहाव के बीच नदी पार कर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे।
इस दौरान नदी का बहाव इतना तेज था कि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। बावजूद इसके ग्रामीण मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हुए।
श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पुल की दरकार
ग्रामीणों के सामने यह समस्या पहली बार नहीं आई है। श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन संभव हो जाता है, लेकिन बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम यात्रा जैसे संवेदनशील मौके पर भी उन्हें सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कचनारिया गांव में पुल का अभाव विकास व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था की तस्वीर
कचनारिया गांव इछावर विधानसभा क्षेत्र में आता है और यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा रहा है। वहीं इछावर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा करते हैं। ऐसे में गांव की यह तस्वीर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों की मांग है कि नदी पर जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में आवागमन के साथ-साथ अंतिम संस्कार जैसे जरूरी कार्यों के लिए भी लोगों को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
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