सरकारी खाते में करोड़ों का मुआवजा, जमीन मालिक अब भी खाली हाथ
बुलेट रिपोर्टर रीवा। राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (NH-39) के चौड़ीकरण के लिए तहसील हुजूर अंतर्गत लोही, खाम्हा, खड्डा, रीठी, महसाव सहित करीब आधा दर्जन गांवों में अधिग्रहित जमीन के मुआवजा वितरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे की राशि शासकीय खाते में उपलब्ध होने के बावजूद पात्र जमीन मालिकों को भुगतान नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक बैंक खाता, दस्तावेज और बायोमेट्रिक अंगूठे सहित आवश्यक प्रक्रिया करीब दो माह पहले ही पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक उनके खातों में मुआवजे की राशि नहीं पहुंची है।
प्रक्रिया पूरी, फिर भी भुगतान का इंतजार
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें मुआवजा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन भुगतान के लिए उन्हें लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका सवाल है कि जब हितग्राहियों की आवश्यक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और राशि शासकीय खाते में उपलब्ध बताई जा रही है, तो भुगतान में देरी क्यों हो रही है?
200 से अधिक जमीन मालिक प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार लोही से गुढ़ तक सड़क किनारे पट्टे की जमीन पर बने करीब 200 से अधिक मकान और जमीनें मुआवजा प्रक्रिया से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन मामलों में मुआवजे की कुल राशि करोड़ों रुपये में है।
अकेले लोही गांव में करीब 20 से 25 घरों के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद राशि अब तक खातों में जमा नहीं की गई है।
ब्याज को लेकर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यदि बड़ी रकम लंबे समय तक शासकीय खाते में पड़ी रहती है तो उस पर ब्याज प्राप्त होता है। उनका दावा है कि पूरी मुआवजा राशि खाते में रहने पर प्रतिमाह करीब 20 से 25 लाख रुपये तक ब्याज आने की संभावना है।
इसी आधार पर ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कहीं ब्याज के लालच में भुगतान को जानबूझकर लंबित तो नहीं रखा जा रहा है।
हालांकि, शासकीय खाते में ब्याज प्राप्त करने के उद्देश्य से मुआवजा राशि रोककर रखने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविकता उच्चस्तरीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
NHAI, बैंक और तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मुआवजा भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने NHAI के संबंधित अधिकारियों, बैंक प्रबंधन और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दस्तावेजी और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो भुगतान में देरी का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कलेक्टर से जांच और तत्काल भुगतान की मांग
प्रभावित ग्रामीणों ने रीवा कलेक्टर से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। साथ ही पात्र भूमिधरों के खातों में मुआवजा राशि तत्काल जमा कराने और भुगतान में देरी की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन सरकार के नाम हो गई, अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई और मुआवजे से संबंधित औपचारिकताएं भी पूरी कर दी गईं, फिर जमीन मालिकों को उनके हक की राशि के लिए अब तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? यही सवाल अब NH-39 चौड़ीकरण से प्रभावित सैकड़ों परिवारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
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