21 करोड़ की साइबर ठगी की जांच शाजापुर पहुंची: भाजपा नेता व जिला पंचायत सदस्य जगदीश फौजी से पूछताछ
बुलेट रिपोर्टर शाजापुर। ग्वालियर में मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय से हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच अब शाजापुर तक पहुंच गई है। मंगलवार देर रात स्टेट साइबर पुलिस ग्वालियर की टीम शाजापुर पहुंची और भाजपा नेता तथा जिला पंचायत सदस्य जगदीश फौजी से पूछताछ की। पूछताछ के बाद उन्हें आगे की जांच के लिए ग्वालियर ले जाया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जगदीश फौजी से जुड़े एक ट्रस्ट के करंट अकाउंट में लगभग 50 लाख रुपये का वित्तीय लेनदेन हुआ था। इसी लेनदेन के आधार पर स्टेट साइबर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उक्त राशि खाते में किस माध्यम से पहुंची और उसका आगे किस प्रकार उपयोग किया गया।
शाजापुर पुलिस अधीक्षक प्रियंका शुक्ला ने बताया कि ग्वालियर से आई स्टेट साइबर पुलिस की टीम 21 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले की जांच के सिलसिले में शाजापुर पहुंची थी। टीम ने जगदीश फौजी से पूछताछ की है। जांच के दौरान संबंधित ट्रस्ट के खाते में करीब 50 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है।
स्टेट साइबर पुलिस के निरीक्षक मुकेश नारोलिया ने बताया कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच में एक बड़े साइबर सिंडिकेट के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। क्षेत्र के कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और सभी वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की जा रही है। उन्होंने बताया कि आरोपी का पुलिस रिमांड लेने की तैयारी की जा रही है तथा जांच के आधार पर आगे अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जगदीश फौजी का राजनीतिक परिचय
जगदीश फौजी भारतीय सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और शाजापुर जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक-6 से चुनाव जीतकर जिला पंचायत सदस्य बने। बाद में उन्हें जिला पंचायत की निर्माण समिति का सभापति बनाया गया। स्थानीय राजनीतिक हलकों में उन्हें प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का करीबी माना जाता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस ने अभी किसी को दोषी घोषित नहीं किया है और जगदीश फौजी से पूछताछ जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे।
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