भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘22% फॉर्मूला’: कम विवादित इलाकों से समाधान की राह!
बुलेट रिपोर्टर एक्सपर्ट/ विजय गुप्ता
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच छह दशक से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान को लेकर कूटनीतिक स्तर पर नई हलचल दिखाई दे रही है। 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में दोनों देशों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
वार्ता के बाद जारी आठ सूत्रीय सहमति में दोनों देशों ने सीमा परिसीमन के लिए “Early and Substantial Harvest” की दिशा में चर्चा आगे बढ़ाने की बात कही है। हालांकि, अभी तक सिक्किम और मिडिल सेक्टर के 765 किलोमीटर हिस्से को लेकर किसी औपचारिक सीमा समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
क्या है ‘22% फॉर्मूला’?
भारत-चीन सीमा की लंबाई भारत सरकार के अनुसार करीब 3,488 किलोमीटर है। इसे पश्चिमी, मिडिल और पूर्वी सेक्टर में देखा जाता है। मिडिल सेक्टर में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड आते हैं, जबकि सिक्किम पूर्वी सेक्टर का हिस्सा है।
एक संभावित रणनीति के तौर पर यदि सिक्किम की करीब 220 किमी और हिमाचल-उत्तराखंड वाले मिडिल सेक्टर की करीब 545 किमी सीमा को जोड़ा जाए तो यह लगभग 765 किमी बनती है। यह कुल 3,488 किमी सीमा का लगभग 22 प्रतिशत है।
इसी गणना के आधार पर इसे ‘22% फॉर्मूला’ कहा जा रहा है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई आधिकारिक सरकारी फॉर्मूला या समझौता नहीं, बल्कि चरणबद्ध सीमा समाधान की संभावित रणनीति का विश्लेषण है।
1. पहले कम जटिल क्षेत्रों से शुरुआत क्यों?
भारत-चीन सीमा विवाद के सभी हिस्सों की जटिलता एक जैसी नहीं है। पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख में विवाद अधिक संवेदनशील है, जबकि हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड वाला मिडिल सेक्टर तुलनात्मक रूप से कम जटिल माना जाता है।
ऐसे में यदि दोनों देश कम विवादित क्षेत्रों में सीमा परिसीमन पर शुरुआती प्रगति करते हैं, तो इससे आगे के कठिन क्षेत्रों पर बातचीत के लिए विश्वास का माहौल बनाया जा सकता है।
2. 25वें दौर की वार्ता में क्या हुआ?
25 अगस्त को बीजिंग में हुई वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए मौजूदा ढांचे के तहत बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।
दोनों देशों ने न्यायसंगत, उचित और दोनों के लिए स्वीकार्य समाधान की दिशा में सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
3. ‘Early and Substantial Harvest’ का क्या मतलब?
इसका आशय यह है कि पूरे सीमा विवाद के अंतिम समाधान की प्रतीक्षा किए बिना कुछ उपयुक्त क्षेत्रों में सीमा परिसीमन से जुड़ी शुरुआती और ठोस प्रगति हासिल करने की कोशिश की जाए।
2025 की 24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भी दोनों देशों ने उपयुक्त सेक्टरों में सीमा परिसीमन के Early Harvest पर काम करने के लिए एक Expert Group बनाने पर सहमति जताई थी।
4. क्या 765 किमी सीमा पर समझौता हो चुका है?
नहीं।
765 किलोमीटर का आंकड़ा सिक्किम और मिडिल सेक्टर की अनुमानित लंबाई को जोड़कर निकाला गया है। फिलहाल दोनों देशों ने इस पूरे हिस्से को अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में औपचारिक रूप से तय करने की घोषणा नहीं की है।
सीमा परिसीमन के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों, मानचित्रों, दावों और जमीन पर वास्तविक स्थिति सहित कई पहलुओं पर विस्तृत बातचीत आवश्यक होगी।
5. चीन की ‘पैकेज डील’ और चरणबद्ध समाधान में क्या अंतर?
चीन लंबे समय से सीमा विवाद के व्यापक राजनीतिक समाधान पर जोर देता रहा है। हाल की वार्ताओं में भी दोनों पक्षों ने पूरे सीमा प्रश्न के लिए एक फ्रेमवर्क के तहत बातचीत जारी रखने की बात कही है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीन ने आधिकारिक रूप से ‘पैकेज डील’ का रास्ता छोड़ दिया है।
संभावना यह है कि व्यापक अंतिम समाधान के साथ-साथ कुछ क्षेत्रों में शुरुआती प्रगति हासिल करने का रास्ता भी तलाशा जा रहा है।
6. ईस्टर्न और मिडिल सेक्टर में बढ़ेंगे सैन्य संवाद तंत्र
25वें दौर की वार्ता का एक अहम परिणाम यह रहा कि दोनों देशों ने ईस्टर्न और मिडिल सेक्टर में दो अतिरिक्त जनरल-लेवल/सीनियर मिलिट्री कमांडर मीटिंग पॉइंट स्थापित करने पर सहमति जताई।
इसके अलावा इन दोनों सेक्टरों में दो अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन चैनल बनाने पर भी सहमति हुई है। इसका उद्देश्य सीमा पर गलतफहमी और किसी घटना के बड़े विवाद में बदलने की संभावना को कम करना है।
7. क्या इससे सैनिकों की तैनाती कम होगी?
सीमा परिसीमन और सैन्य तनाव कम करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। बातचीत में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
भविष्य में यदि सीमा प्रबंधन और परिसीमन पर ठोस प्रगति होती है तो सैन्य तनाव और तैनाती को कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं, लेकिन अभी इसे तय परिणाम के रूप में देखना सही नहीं होगा।
8. सबसे मुश्किल चुनौती—लद्दाख और अरुणाचल
यदि सिक्किम या मिडिल सेक्टर में कोई शुरुआती सहमति बनती भी है तो सबसे जटिल हिस्से अभी बाकी रहेंगे।
पश्चिमी सेक्टर में लद्दाख और पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश से जुड़े दावे अधिक संवेदनशील हैं। इसलिए किसी छोटे या कम विवादित हिस्से पर प्रगति को पूरे सीमा विवाद के समाधान के बराबर नहीं माना जा सकता।
9. 22% पर प्रगति हुई तो क्या बदलेगा?
यदि भविष्य में सिक्किम और मिडिल सेक्टर के बड़े हिस्से में सीमा परिसीमन को लेकर ठोस सहमति बनती है, तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
इसके बाद कठिन क्षेत्रों पर बातचीत के लिए एक नया माहौल बन सकता है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया लंबी और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रहने की संभावना है।
बुलेट रिपोर्टर एक्सपर्ट | निष्कर्ष
भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में ‘22% फॉर्मूला’ फिलहाल आधिकारिक समझौता नहीं, बल्कि चरणबद्ध समाधान की संभावित रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।
25वें दौर की वार्ता से इतना जरूर स्पष्ट है कि दोनों देश सीमा परिसीमन पर शुरुआती और ठोस प्रगति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही ईस्टर्न और मिडिल सेक्टर में नए सैन्य संवाद केंद्र और हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति तनाव प्रबंधन की दिशा में अहम कदम है।
अगर कम जटिल क्षेत्रों में वास्तविक प्रगति होती है, तो यह छह दशक पुराने सीमा विवाद के सबसे कठिन हिस्सों पर बातचीत के लिए नया आधार तैयार कर सकती है।
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