सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण, 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई लाभ
बुलेट रिपोर्टर ब्यूरो कटनी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को कटनी जिले स्थित देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से जटिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग (स्लीमनाबाद टनल) का निरीक्षण किया। करीब 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के माध्यम से सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। इसके चालू होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, रीवा, पन्ना और जबलपुर सहित लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के इंजीनियरिंग इतिहास की सबसे चुनौतीपूर्ण जल-सुरंग परियोजनाओं में से एक है। वर्ष 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को भूगर्भीय कठिनाइयों, भारी जल रिसाव और तकनीकी चुनौतियों के कारण कई बार बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन सरकार के संकल्प और इंजीनियरों की मेहनत से अब यह अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2015 तक सुरंग की खुदाई अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही थी। इसके बाद वर्ष 2016 में जर्मनी से लाई गई आधुनिक टनल बोरिंग मशीन की सहायता से कार्य में तेजी आई। निर्माण के दौरान कई स्थानों पर प्रति मिनट लगभग 25 हजार लीटर पानी का रिसाव हुआ, कठोर मार्बल और लाइमस्टोन की चट्टानों के साथ-साथ भूमिगत गुफाओं ने भी काम को बेहद कठिन बना दिया। बावजूद इसके इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीक और विशेष ग्राउटिंग प्रणाली के जरिए सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह टनल विज्ञान और इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है। नर्मदा का जल अब विंध्य क्षेत्र के उन इलाकों तक पहुंचेगा, जहां वर्षों से पानी की कमी बनी रहती थी। इससे किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी मजबूत होगी। कई स्थानों पर जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना पर अब तक लगभग 1610 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। टनल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना कर सकेगी। सुरंग कई स्थानों पर जमीन से करीब 120 फीट नीचे होकर गुजरती है तथा राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से सुरक्षित तरीके से निकाली गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में यह परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आने वाले महीनों में रबी फसल के लिए बड़ी मात्रा में सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से सिंचाई क्षमता बढ़ाकर लाखों किसानों को इसका लाभ पहुंचाना है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि नहीं बेचने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल होगा।
स्लीमनाबाद टनल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लगभग 10.14 मीटर व्यास वाली इस सुरंग में नर्मदा का पानी बिना किसी भारी पंप या बिजली की सहायता के केवल गुरुत्वाकर्षण के आधार पर प्रवाहित होगा। इससे कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
क्या यह खबर उपयोगी थी?
इस लेख को शेयर करें:
