डिहिया स्कूल में शिक्षा व्यवस्था बेहाल, जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर 1000 बच्चे
बुलेट रिपोर्टर रीवा। जिला मुख्यालय से महज करीब 10 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे संचालित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डिहिया की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बदहाल स्थिति में है। करीब तीन दशक पहले बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता और भवन व्यवस्था के लिए पहचान रखने वाले इस स्कूल में आज करीब 1000 विद्यार्थी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के खड़े होने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। बारिश के दौरान जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से पूरा परिसर कीचड़ और पानी से भर जाता है। वहीं कई भवन जर्जर हालत में हैं और कुछ स्थानों पर छत से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। शिक्षकों का आरोप है कि बार-बार जिम्मेदार विभागों को जानकारी देने के बावजूद व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
बारिश में स्कूल परिसर बना मुसीबत
बरसात के मौसम में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की परेशानी और बढ़ जाती है। परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी जगह-जगह जमा हो जाता है। बच्चों के खड़े होने वाले स्थानों पर घास-फूस और पानी भरा रहता है। कीचड़ के कारण विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने और कक्षाओं तक जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मध्याह्न भोजन के लिए भी सुरक्षित भवन नहीं
स्कूल में मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए भी सुरक्षित भवन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जर्जर भवन में भोजन पकाया जा रहा है, जबकि बच्चों के सुरक्षित बैठकर भोजन करने के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खेल मैदान पर भी संकट
स्कूल के विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त खेल मैदान भी उपलब्ध नहीं है। स्कूल परिसर से लगी जिस जमीन का उपयोग खेल मैदान के तौर पर किया जा रहा है, उसका बड़ा हिस्सा निजी बताया जा रहा है। भविष्य में वहां रोक लगने की स्थिति में विद्यार्थियों के पास खेलकूद के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं बचेगा।
हायर सेकेंडरी भवन की छत से टपक रहा पानी
हायर सेकेंडरी स्तर के भवन भी बदहाल स्थिति में हैं। कई स्थानों पर भवन जर्जर हो चुके हैं। बाउंड्रीवॉल टूटी हुई है और बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। ऐसे माहौल में विद्यार्थी ही नहीं, शिक्षक भी असुरक्षित परिस्थितियों में अध्यापन करने को मजबूर हैं।
जर्जर भवन गिराने तीन महीने पहले भेजा पत्र, कार्रवाई अब तक नहीं
स्कूल के शिक्षकों के अनुसार, कई जर्जर भवनों को गिराने के लिए करीब तीन महीने पहले लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद अब तक भवनों को हटाने या उन्हें सुरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जर्जर भवनों के बीच पढ़ाई जारी रहने से किसी हादसे की आशंका बनी हुई है।
स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क भी खस्ताहाल
स्कूल के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग है, लेकिन करीब 100 मीटर दूर चौराहे से गांवों की ओर जाने वाली प्रधानमंत्री सड़क भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। बारिश के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाता है। इसी रास्ते से स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
तीन दशक में व्यवस्था बदहाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 30 वर्ष पहले यह स्कूल शैक्षणिक गुणवत्ता और भवनों के रखरखाव के मामले में क्षेत्र के बेहतर संस्थानों में गिना जाता था। आज यहां करीब दो दर्जन शिक्षक और प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक के लगभग 1000 विद्यार्थी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
जर्जर भवन, जलभराव, टूटी बाउंड्री, खराब सड़क और खेल मैदान की कमी के बीच स्कूल की स्थिति शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह भी है कि जिला मुख्यालय से इतने नजदीक स्थित स्कूल की बदहाल स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से अब तक कैसे दूर रही।
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