डिप्टी सीएम पहुंचे तो जागा प्रशासन, सात दिन से जलभराव में फंसे 9 लोगों का रेस्क्यू
रीवा | ब्यूरो रिपोर्ट
शहर के वार्ड क्रमांक-10 स्थित गायत्री नगर में सात दिन से जलभराव की समस्या झेल रहे लोगों को आखिरकार राहत मिलना शुरू हो गई है। निचले इलाके में 3 से 4 फीट तक पानी भरे होने के कारण कई परिवार घरों में कैद होकर रह गए थे। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के मौके पर पहुंचने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और एसडीईआरएफ की टीम ने अभियान चलाकर जलभराव में फंसे 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में सभी को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सात दिन तक घरों में कैद रहे लोग
गायत्री नगर के निचले क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से पानी भरा हुआ था। लगातार जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया था। कई परिवारों के सामने भोजन, आवागमन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी हो गई थीं।
प्रभावित नागरिकों ने लंबे समय से जल निकासी की मांग की, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। हालात की गंभीरता सामने आने के बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
एसडीईआरएफ और स्वास्थ्य टीम को उतारा मैदान में
डिप्टी सीएम ने एसडीआरएफ टीम इंचार्ज विकास पांडेय तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर तैनात किया। इसके बाद एसडीईआरएफ की टीम ने जलभराव वाले क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाकर 9 प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकाला।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेस्क्यू किए गए लोगों की जांच की, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
60-60 हॉर्स पावर के पंप से पानी निकासी
जलभराव से स्थायी राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने बड़े पैमाने पर जल निकासी का काम शुरू किया है। डिप्टी सीएम के निर्देश पर सीमेंट फैक्ट्री से 60-60 हॉर्स पावर क्षमता के मड मोटर पंप मंगवाए गए हैं। इन पंपों के जरिए लगातार पानी बाहर निकाला जा रहा है।
प्रशासन का दावा है कि जल्द ही क्षेत्र को जलभराव से पूरी तरह मुक्त करा लिया जाएगा।
प्लॉटिंग ने बढ़ाई मुश्किल, पुरानी खदान का निचला क्षेत्र बना मुसीबत
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, गायत्री नगर का यह इलाका पहले पुरानी खदान क्षेत्र रहा है और निचला होने के कारण यहां बारिश का पानी जमा हो जाता है। लोगों का आरोप है कि इसी निचले क्षेत्र में प्लॉटिंग किए जाने के बाद जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बारिश के दौरान हालात विकराल हो गए।
अब सात दिन तक पानी जमा रहने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर निचले क्षेत्र में प्लॉटिंग की अनुमति देते समय जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधा सहित सभी जरूरी बुनियादी व्यवस्थाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीनानाथ वर्मा, वार्ड क्रमांक-10 की पार्षद अमिता वीरेंद्र सिंह सहित नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ब्यूरो रिपोर्ट — रीवा, मध्यप्रदेश।
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